गधे से मनुष्य को सीखनी चाहिए तीन बातें,जानिये चाणक्य नीति से

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आचार्य चाणक्य मौर्य वंश के महान कूटनीतिज्ञ थे.उनका ग्रन्थ चान्क्यनीति आज के युग में भी प्रासंगिक है.

आचार्य चाणक्य ने चान्क्यनीति में कहा है कि मानव को जीवन में हर किसी से सीखना चाहिए चाहे वह जानवर ही क्यों न हो . आचार्य चाणक्य ने गधे से तीन चीजें सीखने की सलाह दी है,जो कि चाणक्य नीति के निम्न श्लोक से स्पष्ट है:

सुश्रान्तोअपि वहेद भारम शीतोष्ण च न पश्यति I

संतुष्टशचरति नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभातं II

(1)अत्यधिक थकान होने पर भी गधा बोझा ढोता रहता है उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति को भी आलस्य न करके अपने लक्ष्य की प्राप्ति और सिद्धि के लिए प्रार्थना करते रहना चाहिए, कर्तव्य पथ से कभी विमुख नहीं होना चाहिए.

(2) कार्यसिद्धि में ऋतुओं के सर्द और गर्म होने की भी चिंता नहीं करनी चाहिए

(3)जिस प्रकार गधा संतुष्ट होकर जहां तहां चर लेता है उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति को भी सदा संतोष फल की चिंता किए बिना कर्म में प्रवृत रहना चाहिए.

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