भारत में सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज को पद से कैसे हटाया जाता है ?मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव शुरूआती चरण में ही हुआ खारिज

How to remove sitting Supreme Court or High court Judge in India?

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भारत में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस व उसके सहयोगिओं ने मिलकर भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पद से हटाने के लिए प्रक्रिया 20 अप्रैल 2018 को शुरू कर दी है,इसके तहत 64  वर्तमान राज्यसभा के सांसदों ने,चेयरमेन वेंकया नायडू को मुख्य न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का  नोटिस दिया है.इस प्रस्ताव को चेयरमेन वैंकया नायडू द्वारा शुरूआती स्टेज में ही खारिज कर दिया है.साथ ही राज्यसभा स्पीकर वैंकया नायडू ने प्रस्ताव को राजनीती से भी प्रेरित बताया है.

नागरिको को यह जानना जरुरी है कि सुप्रीमकोर्ट के जजों को हटाने की क्या प्रक्रिया होती है,चूंकि हाईकोर्ट के जजों को हटाने की प्रक्रिया भी सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के समान होती है.अत: इस आर्टिकल में वह भी कवर हो जायेगी.

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया जजेज  इंक्वायरी एक्ट 1968 व भारतीय संविधान के आर्टिकल 124(4) के तहत पूरी की जाती है आइए जान लेते हैं कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत क्या क्या होता है:

  • सबसे पहले राज्यसभा या लोकसभा के सांसदों द्वारा सदन के चेयरमैन या  स्पीकर को सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोटिस किया जाता है यह नोटिस राष्ट्रपति के नाम लिखा जाता है.राज्यसभा के अध्यक्ष को चेयरमेन व लोकसभा के अध्यक्ष को स्पीकर कहते हैं.
  • यह नोटिस संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन में या दोनों सदनों में दिया जा सकता है.
  • जिस सदन के अध्यक्ष को पहले नोटिस दिया जाता है वहीं प्रक्रिया शुरू हो जाती है.दोनों सदनों में प्रक्रिया शुरू करवाने के लिए दोनों सदनों के अध्यक्ष को एक ही दिन नोटिस देना होता है.
  • राज्यसभा में प्रक्रिया शुरू करने के लिए न्यूनतम 50 व लोकसभा में प्रक्रिया शुरू करवाने के लिए न्यूनतम 100 सांसदों की आवश्यकता होती है.
  • जिस भी सदन के अध्यक्ष को यह नोटिस दिया जाता है,उसे नोटिस को शुरू में स्वीकार करने या अस्वीकार का अधिकार होता है.अगर नोटिस का प्रस्ताव अस्वीकार हो जाता है तो आगे जज पर कोई कार्यवाही नहीं होती.अगर नोटिस स्वीकार हो जाता है तब स्पीकर या चेयरमेन या दोनों ,जजेज इन्क्वायरी एक्ट के अनुसार कमेटी  बनाते हैं जिसमें एक सुप्रीम कोर्ट के जज व एक हाईकोर्ट के जज व एक ऐसा व्यक्ति होता है जो विद्वान् हो व कानून को जानने वाला हो.
  • उसके बाद कमेटी जज पर लगे आरोपों  की जांच की जाती है,आरोपी जज से स्पष्टीकरण माँगा जाता है व जज अपने बचाव में साक्ष्य देना चाहे वह भी दे सकता है.कमेटी के पास सिविल कोर्ट के समान अधिकार होते हैं.उसके  बाद कमेटी फाइनल रिपोर्ट बनाकर स्पीकर या चेयरमेन या दोनों को दे देती है .रिपोर्ट को स्पीकर या चेयरमेन या दोनों द्वारा अपने सदन के समक्ष रखा जाता है. अगर रिपोर्ट में आरोपी  जज दोषी नहीं पाया जाता है तो सारी  प्रक्रिया ख़त्म हो जाती है.
  • अगर जांच रिपोर्ट  में जज दोषी पाया जाता है तो भारतीय संविधान के आर्टिकल 124(4) के तहत कार्यवाही की जाती है.हाईकोर्ट के जज को हटाने के लिए भी भारतीय संविधान के आर्टिकल 217(1)(b) में आर्टिकल 124(4) को फोलो करने को कहा गया है.
  • आर्टिकल 124(4) के तहत किसी भी सुप्रीम कोर्ट के जज को दोनों सदनों के बहुमत के बाद  राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है.जिस दिन दोनों सदनों वोटिंग होती है व बहुमत हटाने  के लिए हो जाता है तो उसी दिन स्पीकर या अध्यक्ष या दोनों के द्वारा  सदनों की कार्यवाही राष्ट्रपति को भेजकर दोषी जज को हटाने का आदेश पास करने की मांग की जाती है.वोटिंग के दौरान दो तिहाई सदस्यों का उपस्थित रहना जरुरी है.अगर संसद के दोनों सदनों में बहुमत न मिले तो दोषी जज को नहीं हटाया जा सकता है.
आशा है आपको आर्टिकल पसंद  आया होगा.आप आर्टिकल को निम्न लिंक पर व सुन सकते हैं:

लिंक पर व सुन सकते हैं:

भ्रष्ट सुप्रीम कोर्ट के जजों को हटाने की यही प्रक्रिया है.

आपको क्या लगता है सुप्रीम  कोर्ट के भ्रष्ट जजों पर कार्यवाही  की यह प्रक्रिया सही है?कृपया शेयर,कमेन्ट व लाइक करना न भूलें.

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