चाणक्य मौर्यकाल के दौरान महान कूटनीतिज्ञ थे.उनका ग्रन्थ चाणक्य नीति आज के युग में भी प्रासंगिक है.आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रन्थ में कूटनीति के अलावा जीवन जीने की कला भी बताई गई है.

आचार्य चाणक्य ने कहा है कि मानव को जीवन में हर किसी से सीखना चाहिए चाहे वह जानवर ही क्यों न हो . आचार्य चाणक्य ने कुत्ते से छ: चीजें सीखने की सलाह दी है,जो कि चाणक्य नीति के निम्न श्लोक से स्पष्ट है:

बहवाशी स्वल्प्संतुष्ठ सुनिद्रो लघुचेतन: I

स्वामी भक्तश्च शूररश्च षडेते श्वान्तो गुणा:II

(1)कुत्ते में अधिक खाने की क्षमता होती है उसी प्रकार मनुष्य में भी होनी चाहिए.कहने का तात्पर्य है कि कुत्ते की पाचन शक्ति अच्छी होती है,उसी प्रकार मनुष्य की भी होनी चाहिए.

(2) कुत्ते में अधिक खाने की क्षमता होने के बावजूद भी कई बार उसे भोजन नहीं मिलता तो वह अपना काम चला लेता है .भावार्थ यह है कि अधिक अथवा बहुत अच्छा भोजन मिलने पर जिस प्रकार व्यक्ति को संतुष्टि मिलती है उसी प्रकार थोड़ा-थोड़ा रूखा-सूखा भोजन प्राप्त होने पर भी मनुष्य को संतुष्ट रहना चाहिए.

(3)कुत्ते की आदत होती है कि वह गहरी नींद में सोता है.व्यक्ति को भी ऐसा होना चाहिए कि वह गहरी नींद ले.

(4)परंतु नींद लेने के साथ ही कुत्ता इस प्रकार चौकन्ना भी रहता है कि जरा सी आहट होने पर वह एकदम जाग जाता है. इसी प्रकार मनुष्य को भी इस बात का अभ्यस्त होना चाहिए कि थोड़ी सी आहट पर सावधान हो जाए.

(5) स्वामीभक्ति कुत्ते का सुप्रसिद्ध गुण है.यहां व्यक्ति को अपने स्वामी के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने का कोई भी अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहिए.

(6)कुत्ते का अंतिम गुण यह है कि शत्रु पर आक्रमण कर देता है और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए सदैव तैयार रहता है. उसी प्रकार मनुष्य को भी अपनी वीरता प्रकट करने के लिए सदैव उद्धत रहना चाहिए.

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