हथेली में रेखाओं ,पर्वतों की स्थिति व उनके प्रभाव

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मनुष्य के हाथ की महिमा भारतीय शास्त्रों में वर्णित निम्न दो दोहों द्वारा प्रकट की जा सकती है:

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती,
कर मूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम्.

अर्थात मनुष्य के हाथ के आगे के भाग में लक्ष्मी व मध्य भाग में माता सरस्वती व हाथ के मूल में सृष्टी के रचयिता ब्रह्मा जी का निवास है व सुबह उठते ही हाथ का दर्शन करना चाहिए.

शास्त्रों में वर्णित एक अन्य दोहे में भी हाथ के महत्व को बताया गया है,उसमें ब्रह्मा की जगह गोविन्द शब्द का प्रयोग किया गया है,दोहा निम्न है :

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती,
करमूले तू गोविन्दः प्रभाते कर दर्शनम.

अर्थात मनुष्य के हाथ के आगे के भाग में लक्ष्मी व मध्य भाग में माता सरस्वती व हाथ के मूल में सृष्टी के रचयिता विष्णु जी का निवास है व सुबह उठते ही हाथ का दर्शन करना चाहिए.

अत: उपरोक्त दोहों के अनुसार मनुष्य के हाथ का आध्यात्मिक महत्त्व है .आधुनिक काल का सारा ज्ञान- विज्ञान केवल एक बात के लिए परिश्रम कर रहा है कि मनुष्य को भविष्य में सुख कैसे मिले.परन्तु भविष्य को जानने की सारी कोशिशें उनकी विफल साबित हुई है.हमें नमन करना चाहिए सृष्टी के रचयिता का जिसने भविष्य की छोटी से छोटी घटना को हमारे हाथ में टेढ़ी मेढ़ी लकीरों के माध्यम से अंकित कर दिया है बस आवश्यकता है तो उसको पढ़ने में पारंगत व्यक्ति की.भारत के महान ऋषि मुनियों ने अपने कठोर तपस्या द्वारा यह ज्ञान मानव जाति को हस्त रेखा विज्ञान के रूप में सुलभ कराया है.हथेली के मुख्य: भागों को निम्न चित्र द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है:

हथेली में रेखाओं व पर्वतों की स्थिति

ऊपर के चित्र में दिखाए गए हथेली के मुख्य भागों को नीचे समझाया गया है:

1.जीवन रेखा:यह रेखा व्यक्ति की आयु बताती है.इसके बारे में विस्तार से ऐप्लिकेसन के जीवन रेखा वाले हिस्से में देखा जा सकता है.

2.मस्तिष्क रेखा:यह रेखा व्यक्ति की बुद्धिमत्ता के बारे में व दिमागी स्थिति के बारे में बताती है.इसके बारे में विस्तार से ऐप्लिकेसन के मस्तिष्क रेखा वाले हिस्से में देखा जा सकता है.

3.ह्रदय रेखा:यह रेखा व्यक्ति की भावुकता व प्रेम के बारे में बताती है.इसके बारे में विस्तार से ऐप्लिकेसन के ह्रदय रेखा वाले हिस्से में देखा जा सकता है.

4.शुक्र पर्वत:यह ग्रह व्यक्ति की कामुकता/नपुसंकता के बारे में बताता है.यह गृह अंगूठे व जीवन रेखा के बीच में स्थित होता है जैसा कि प्रथम चित्र में दिखाया गया है.

5.चन्द्र पर्वत:चन्द्र ग्रह व्यक्ति की कल्पनाशीलता व विदेश यात्रा से सम्बंधित है.यह हथेली में इस स्क्रीन के प्रथम चित्र के अनुसार पाया जाता है.

6.राहू पर्वत:राहू ग्रह जुए/केसीनो में लोटरी जीतने व आकस्मिक धन प्राप्ति से सम्बंधित है.यह मस्तिष्क रेखा व जीवन रेखा के बीच पाया जाता है जैसा कि शुरू में दिए गए चित्र में दिखाया गया है.

7.केतु पर्वत:केतु ग्रह बैंक में धन संचय के बारे में बताता है.यह चन्द्र गृह और जीवन रेखा के बीच में पाया जाता है जैसा कि शुरू के चित्र में बताया गया है.

8.गुरू पर्वत:गुरु ग्रह सरकारी नौकरी,उच्च पद व वैवाहिक जीवन से सम्बंधित है.यह ग्रह तर्जनी अंगुली के नीचे पाया जाता है.गुरु ग्रह को इस स्क्रीन की शुरूआती चित्र में दिखाया गया है.

9.सूर्य पर्वत:सूर्य ग्रह जीवन में यश और प्रतिष्ठा के बारे में बताता है.यह ग्रह अनामिका अंगुली के नीचे पाया जाता है जैसा कि शुरूआती चित्र में बताया गया है.

10.शनि पर्वत:शनि ग्रह भाग्य और जीवन में आने वाली बाधाओं से सम्बंधित है.यह मध्यमा अंगुली के नीचे शुरूआती दिखाए चित्र के अनुसार हथेली में पाया जाता है.

11.बुध पर्वत:बुध ग्रह व्यक्ति की वैज्ञानिक क्षमता व व्यापार में सफलता के बारे में बताता है.यह ग्रह कनिष्ठिका अंगुली के नीचे शुरुआत में दिखाए चित्र के अनुसार पाया जाता है.

12.मंगल पर्वत:मंगल ग्रह व्यक्ति की साहसिक क्षमता व निर्णय लेने की प्रवृति के बारे में बताता है.हथेली में दो मंगल होते हैं जिन्हें शुरूआती चित्र में प्रदर्शित किया गया है.

13.भाग्य रेखा:भाग्य रेखा व्यक्ति के भाग्य के बारे में बताती है.यह रेखा हथेली के किसी भी हिस्से से शुरू होकर शनि पर्वत पर समाप्त होती है.भाग्य रेखा का फलादेश उसके उद्गम के अनुसार निर्भर करता है.मुख्यतः 11 प्रकार की भाग्य रेखा होती है जो चित्र में दिखाई गयी हैं:

                                                          भाग्य रेखा के ग्यारह प्रकार

14.सूर्य रेखा:सूर्य रेखा व्यक्ति की समाज में प्रतिष्ठा के बारे में बताती है.यह रेखा हथेली के किसी भी हिस्से से शुरू होकर सूर्य पर्वत पर समाप्त होती है.सूर्य रेखा का फलादेश उसके उद्गम के अनुसार निर्भर करता है.मुख्यतः 12 प्रकार की भाग्य रेखा होती है जो चित्र में दिखाई गयी हैं:

                                                          सूर्य रेखा के बारह प्रकार

15.विवाह रेखा:विवाह रेखा कनिष्ठिका अंगुली के नीचे होती है.यह एक से ज्यादा भी हो सकती है.यह रेखा विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण,विवाह व बच्चों की संख्या के बारे में बताती हैं.चित्र में हरे रंग की रेखाएं विवाह रेखाएं हैं:

                                                            विवाह रेखा (हरा रंग )

आप उपरोक्त आर्टिकल निम्न वीडिओ में भी सुन व देख सकते हैं:

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