भारतीय दंड सहिंता 498a का दुरुपयोग व माननीय उच्चतम न्यायालय के हालिया दिशा निर्देश

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जब किसी महिला का पति या पति का रिश्तेदार ,महिला के साथ ऐसी क्रूरता करता है जिससे महिला आत्महत्या करने को आतुर हो जाए या पति या पति का कोई रिश्तेदार महिला से दहेज़ की मांग करे तब यह भारतीय दंड सहिंता की धारा 498a के तहत अपराध होता है .इस धारा के तहत ३ साल की सजा व जुर्माने का भी प्रावधान है .यह धारा गैरजमानती व संज्ञेय है.

इस धारा कि शुरुआत सन 1983 में हुई थी व धीरे धीरे समय के साथ इसका दुरूपयोग बढ़ने लगा .इस धारा के तहत दर्ज कराये गए 95 फीसदी से अधिक मामले झूठे पाए गए.इस धारा का उपयोग पत्नी व उसके माता पिता द्वारा अपने अहम की संतुष्टि के लिए किया जाने लगा.शिकायत होते ही इस धारा के अंतर्गत पति व उसके घर वालों को गिरफ्तार कर लिया जाता था.लाखों निर्दोष लोग इस धारा के अंतर्गत जेल गए .सन 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे कानूनी आतंकवाद की संज्ञा दी.परन्तु इसका दुरूपयोग बंद नहीं हुआ व यह धारा पति व उसके घर वालों से पैसा ऐठने का जरिया बन गयी. चिंतित होकर सुप्रीम कोर्ट समय समय पर सरकार को इसमें परिवर्तन करने के लिए कहता रहा पर सरकार ने कुछ नहीं किया.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राजेश शर्मा बनाम उत्तरप्रदेश राज्य नामक विधि व्यवस्था में दिनांक 27/07/2017 को नए दिशा निर्देश जारी किये हैं जिसके तहत फेमिली वेलफेयर कमेटी का गठन हर जिले में होगा व धारा 498a की शिकायत पर सीधी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने पर पुलिस ने रोक लगा दी है.जैसे ही पुलिस के पास महिला कोई शिकायत लेकर पहुचेगी मामले को सीधे फेमिली वेलफेयर कमेटी के पास भेज दिया जाएगा व कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही तय होगा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए या नहीं ,साथ ही पति व उसके घरवालों की गिरफ्तारी पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गयी है.ज्यादा जानने के लिए वीडिओ लिंक पर क्लिक करें:

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